कृष्ण संग रास रचाने नारी बने भोलेनाथ
लटेरी नई हलचल। नगर सहित ग्रामीण अंचल में शरद पूर्णिमा का पर्व इस बार बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। देर शाम से ही नगर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। जगह-जगह मंदिरों में खीर का प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने चांदनी रात में खीर का भोग लगाकर भगवान के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
नगर के श्रीजीपुरम स्थित चितचोर सरकार मंदिर में शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन किया गया। यहां देर शाम भगवान का विशेष श्रृंगार कर महाआरती की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में महारास का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भजन-कीर्तन और रास की धुन पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महारास के बाद मंदिर समिति की ओर से आए हुए सभी भक्त गणों को भोजन भी कराया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
इसी प्रकार नगर के दुर्गा मंदिर और तालाब वाले मंदिर में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। सुबह से ही मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य चल रहा था। शाम होते ही महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिरों में खीर की प्रसादी के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। पुजारियों ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है, इसलिए खीर को चांदनी में रखकर भगवान को भोग लगाया जाता है।
नगर के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों में भी शरद पूर्णिमा पर विशेष पूजा-अर्चना हुई। लोगों ने अपने घरों में भी खीर बनाकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया। देर रात तक नगर में उत्सव का माहौल बना रहा









