विदिशा नई हलचल। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के आह्वान पर विदिशा जिले के कोटवार पिछले एक महीने से आंदोलन पर हैं। 2 अक्टूबर से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे कोटवारों ने 22 अक्टूबर से पूरी तरह काम बंद कर दिया है। अब शासन द्वारा दी जा रही सिली हुई वर्दी से भी कोटवारों में भारी नाराजगी है।
कोटवारों का कहना है कि 3 साल से वर्दी के लिए राशि नहीं दी गई। पहले वर्दी भत्ता मिलता था जिससे वे अपनी नाप की अच्छी वर्दी सिलवा लेते थे, लेकिन अब प्रशासन द्वारा एक ही नाप की सिली-सिलाई वर्दी दी जा रही है, जो न तो नाप की है और न ही गुणवत्ता की। कई कोटवारों को वर्दी छोटी-बड़ी मिल रही है, कपड़ा भी घटिया है। इसे कोटवार अपने सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं और इसे मांगों को टालने का तरीका बता रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांगे हैं – शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर नियमित किया जाए, मानदेय 8 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये किया जाए और आवासीय भूमि का पट्टा दिया जाए। वर्दी भत्ता और बकाया भुगतान भी प्रमुख मांगों में शामिल है।
हड़ताल के चलते जिले में राजस्व कार्य ठप पड़े हैं। जमीन की नाप-जोख, नोटिस तामीली, स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री में गवाह की भूमिका और गांव स्तरीय अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिला संघ ने चेतावनी दी है कि 30 अक्टूबर तक मांगें नहीं मानी गईं तो 31 अक्टूबर को भोपाल में प्रदेश स्तरीय महापड़ाव में विदिशा, लटेरी, सिरोंज, कुरवाई और गंजबासौदा के कोटवार बड़ी संख्या में शामिल होंगे








