प्रतिमा विसर्जन के दौरान तिघरा बांध में डूबे 2 युवक, 5 घंटे बाद मिले शव प्रतिबंधित महिदपुर और सुजवाया घाट पर हुआ हादसा, प्रशासन की चूक पर उठे सवाल

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ग्वालियर नई हलचल । माता की प्रतिमा विसर्जन की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। ग्वालियर के तिघरा बांध के प्रतिबंधित घाटों पर विसर्जन करने पहुंचे दो युवक गहरे पानी का शिकार हो गए। अलग-अलग घाटों पर डूबे दोनों युवकों के शव करीब 5 घंटे की तलाश के बाद रात लगभग 1 बजे बरामद किए गए मृतकों की पहचान बिरथरी पुरा, गिरवाई निवासी 25 वर्षीय पंकज जाटव पुत्र संतोष जाटव और संजय नगर, गोल पहाड़िया निवासी 28 वर्षीय राहुल जाटव के रूप में हुई है।

अलग-अलग घाटों पर हुआ हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों युवक अपने-अपने मोहल्ले के साथियों के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जित करने तिघरा क्षेत्र पहुंचे थे।

पंकज की महिदपुर घाट पर डूबने से मौत हुई, वहीं राहुल सुजवाया घाट पर गहरे पानी में समा गया। विसर्जन के उत्साह के बीच किसी को भनक तक नहीं लगी कि पानी इतनी जल्दी दो हंसते-खेलते युवकों को लील जाएगा।

साथियों की कोशिशें नाकाम, फिर 5 घंटे तलाश

जब साथियों ने दोनों युवकों को गहरे पानी में डूबते देखा तो आनन-फानन में तलाश शुरू की। पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। करीब पांच घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद रात लगभग 1 बजे दोनों के शव बरामद हुए।

एक जानकारी के अनुसार दोनों को पानी से बाहर निकालकर तुरंत जयारोग्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तिघरा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

300 फीट से ज्यादा गहराई, मगरमच्छ का खतरा

सीएसपी ग्वालियर कृष्णपाल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सुजवाया और महिदपुर इलाके बांध के सबसे खतरनाक छोर माने जाते हैं। यहां तिघरा बांध की गहराई 300 फीट से अधिक है। पानी के भीतर खतरनाक चट्टानें, गहरे गड्ढे और झाड़ियों का जाल है, साथ ही यहां मगरमच्छों का भी खतरा रहता है।

पुलिस और प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि इन क्षेत्रों में आम लोगों का जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद दोनों युवक अपने साथियों के साथ अलग-अलग घाटों पर पहुंच गए।

प्रशासन सागरताल पर तैनात, तिघरा पर कोई निगरानी नहीं

प्रशासन ने इस बार प्रतिमा विसर्जन के लिए सागरताल को निर्धारित किया था और सुरक्षा के लिहाज से पूरा पुलिस बल व प्रशासनिक अमला वहीं तैनात था। अधिकारियों को उम्मीद थी कि सागरताल तय होने के कारण तिघरा पर कोई नहीं आएगा, जिसके चलते तिघरा के इन दूरदराज और प्रतिबंधित घाटों पर पुलिस की कोई तैनाती या निगरानी नहीं थी।

इसी का फायदा उठाकर लोग वहां पहुंचते रहे और यह अनहोनी घट गई। प्रशासन की अपील और सख्त चेतावनी बोर्ड लगे होने के बावजूद लोगों की यह लापरवाही दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म दे गई है।

हादसे के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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