दुनिया के नक्शे में चमकता भारत
भोपाल नई हलचल डॉ सोहन भार्गव की विशेष रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में जो करवट ली है, वह स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी। वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी, तब भारत की नॉमिनल जीडीपी लगभग 2.02 ट्रिलियन डॉलर थी। आज 2026 में यह आंकड़ा 4.15 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है। यानी महज 12 वर्षों में अर्थव्यवस्था का आकार दोगुने से भी अधिक हो गया है। इस जबरदस्त उछाल का सबसे सुखद पहलू यह है कि इसका लाभ केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम आदमी की जेब तक पहुंचा है। 2014 में देश की प्रति व्यक्ति आय लगभग 1,540 डॉलर थी, जो 2026 में बढ़कर 2,810 डॉलर हो गई है। रुपये के संदर्भ में देखें तो एसबीआई रिसर्च के अनुसार प्रति व्यक्ति जीडीपी मौजूदा कीमतों पर 2.35 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जो मोदी शासन के दशक में 2.6 गुना वृद्धि दर्शाती है।
नीतिगत सुधारों का परिणाम
इस आर्थिक चमत्कार के पीछे सुनियोजित आर्थिक सुधार हैं। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, जीएसटी, जनधन योजना और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने न केवल निवेश का माहौल बनाया, बल्कि करोड़ों गरीबों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा। बैंकिंग व्यवस्था के सुदृढ़ होने से कर्ज की उपलब्धता बढ़ी, जिससे छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को नई उड़ान मिली।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहेगी, जो चीन के 4 प्रतिशत, अमेरिका के 1.8 प्रतिशत और ब्रिटेन के 1.1 प्रतिशत से कहीं अधिक है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
आम आदमी की कमाई में वास्तविक वृद्धि
क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर देखें तो तस्वीर और भी प्रभावशाली है। 2014 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी (PPP) लगभग 5,000 डॉलर थी, जो आज 12,000 डॉलर से अधिक हो चुकी है, यानी 240 प्रतिशत की वृद्धि।
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में प्रति व्यक्ति आय में अस्थायी गिरावट जरूर आई, लेकिन उसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की और विकास की रफ्तार पुनः पकड़ ली।

नरेंद्र मोदी के शासनकाल में जीडीपी में हुआ जबरदस्त उछाल केवल सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है। यह करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार, बढ़ती आय और उज्ज्वल भविष्य की कहानी है। पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ता भारत आज वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से खड़ा है, और इस आत्मविश्वास की नींव में है आम आदमी की बढ़ती समृद्धि









