नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 वर्ष कठोर कारावास साथ ही किया रुपये 20,000 के अर्थदंड से दंडित

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गंजबासौदा नई हलचल/ जिला विदिशा के जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में पुलिस द्वारा की गई प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹20,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

अभियोजन अधिकारी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/एस.पी.ओ. दिनेश कुमार असैया द्वारा बताया गया कि माननीय न्यायालय राकेश कुमार ठाकुर, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बासौदा के न्यायालय के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश एवं पॉक्सो न्यायालय बासौदा द्वारा दिनांक प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए आरोपी को संबंधित धाराओं में दोष सिद्ध किया गया।
प्रकरण में 05 वर्षीय बालिका की माँ द्वारा दिनांक 02 सितंबर 2025 को थाना शहर बासौदा में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर बताया गया था, कि उसकी बच्ची के साथ ऑटो चालक द्वारा गलत कृत्य किया गया है।

पुलिस द्वारा प्रकरण में त्वरित एवं साक्ष्य आधारित विवेचना करते हुए पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया तथा महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों के लिए डी.एन.ए परीक्षण कराया गया। पीड़िता एवं उसकी माँ के धारा 183 बी.एन.एस.एस के कथन कराए गए। विवेचना के दौरान उपलब्ध मौखिक, दस्तावेजी, भौतिक एवं चिकित्सकीय साक्ष्यों का संकलन कर उन्हें विवेचना में शामिल किया गया।
प्रकरण में अनुसंधान एवं विवेचना एस.डी.ओ.पी शिखा भलावी द्वारा की गई। संपूर्ण विवेचना उपरांत पुलिस द्वारा आरोपी के विरुद्ध चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण जिला विदिशा के जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरणों की सूची में भी शामिल था।

16 अभियोजन एवं 11 बचाव पक्ष के गवाहों के कथन
न्यायालयीन विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 16 गवाहों के कथन कराए गए, जबकि बचाव पक्ष द्वारा 11 गवाहों के कथन प्रस्तुत किए गए। प्रकरण में मेडिकल साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट, मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का पक्ष प्रमाणित हुआ।

अभियोजन के तर्कों एवं उपलब्ध साक्ष्यों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध कर 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹20,000 के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रकरण के शीघ्र निराकरण एवं न्यायालयीन कार्यवाही में सहयोग के लिए प्रभारी उपनिदेशक/सहायक निदेशक, जिला विदिशा द्वारा समय-समय पर मार्गदर्शन दिया गया। प्रकरण में शीघ्र समंस/वारंट की तामीली एवं न्यायालयीन कार्यवाही में सहयोग आरक्षक रीतेश तिवारी द्वारा किया गया।

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