यूजीसी के इक्विटी विनियमों पर सर्व-समाज का हुंकार, गंजबासौदा में सड़कों पर उतरा जनसैलाब
गंजबासौदा नई हलचल
यूजीसी 2026 के इक्विटी विनियमों के विरोध में मंगलवार को गंजबासौदा में सर्व-समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतर आया। दोपहर 12 बजे शीतला शक्ति धाम से शुरू हुआ जुलूस तहसील परिसर पहुंचा। विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला शक्ति ने इसमें सहभागिता की। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम एसडीएम अनुभा जैन को ज्ञापन सौंपकर विनियमों पर पुनर्विचार और व्यापक राष्ट्रीय विमर्श की मांग की गई। ज्ञापन से पूर्व उसका वाचन अमानसिंह राजपूत ने किया। ज्ञापन में नगर के अलावा विदिशा से भी विभिन्न समाजों के जिला प्रतिनिधि शामिल हुए।
मालूम हो कि यूजीसी के 2026 के इक्विटी विनियमों को लेकर देशभर में उच्च शिक्षा में समानता, निष्पक्षता और सामाजिक समरसता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चल रही है। इसी क्रम में गंजबासौदा में भी सर्व-समाज ने अपनी आपत्तियां और मांगें राष्ट्रपति के समक्ष रखने के लिए प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विनियमों पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श, सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित करने तथा निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
यूजीसी विरोध में एक मंच पर दिखे अलग-अलग समाज
प्रदर्शन में ब्राह्मण दल, ब्राह्मण समाज, दांगी समाज, जैन समाज, सिंधी महापंचायत, अरोरा समाज, रघुवंशी समाज, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज, गुप्ता समाज, राजपूत समाज और विदिशा महाराणा प्रताप राजपूत विकास समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही।
आंदोलनकारियों का कहना था कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, निष्पक्षता और सामाजिक समरसता का वातावरण होना चाहिए। ज्ञापन में किसी जाति अथवा समुदाय के अधिकारों को कम करने की मांग नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी के लिए समान न्याय और अवसर सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
शीतला शक्ति धाम से तहसील तक पैदल मार्च.. जय स्तंभ चौक पर हुए प्रदर्शन
दोपहर 12 बजे सर्व-समाज के नागरिक शीतला शक्ति धाम पर एकत्र हुए। यहां से जुलूस शुरू हुआ, जो तहसील परिसर पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान यूजीसी के 2026 के इक्विटी विनियमों को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें रखी गईं। आयोजकों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी समाज या वर्ग के अधिकारों के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि समानता, सामाजिक समरसता, निष्पक्ष न्याय और प्रत्येक विद्यार्थी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग को सामने रखना है। मांग यह है कि उच्च शिक्षा में समानता, सामाजिक न्याय, प्राकृतिक न्याय और समान अवसर की व्यवस्था हो तथा शिकायतों के निराकरण में सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई मिले। ज्ञापन में इसी उद्देश्य से यूजीसी के 2026 के विनियमों पर पुनर्विचार और व्यापक राष्ट्रीय संवाद की मांग की गई है।
आरोप के साथ सजा नहीं, पहले निष्पक्ष सुनवाई की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि किसी विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत होने पर केवल आरोप के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। साथ ही वास्तविक पीड़ितों को प्रभावी संरक्षण तथा झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
सर्व-समाज संघर्ष मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में यूजीसी 2026 के प्रावधानों पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श, सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करने की मांग की। ज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और कोचिंग सुविधाएं बढ़ाने की मांग भी शामिल है









