कौन रोक रहा स्थानांतरण, स्थानांतरण के बाद कुछ दिन में उसी स्थान पर कैसे वापसी जंगल काटने के बाद भी जनप्रतिनिधि क्यों इतने मेहरबान ?
विदिशानई हलचल डॉ सोहन भार्गव प्रधान संपादक। जिले के लटेरी, शमशाबाद, गंजबासौदा और उदयपुर के जंगलों में सागौन की अवैध कटाई थमने का नाम नहीं ले रही है। वन विभाग आए दिन कार्रवाई के दावे करता है, अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी चलाई जाती है, कभी वनरक्षकों को निलंबित भी किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है। बड़ा सवाल यह है कि जिन बीटों में बार-बार अवैध कटाई पकड़ी जा रही है, वहां कई-कई सालों से जमे फील्ड कर्मचारियों को जिले से बाहर क्यों नहीं किया जा रहा?
सूत्रों के अनुसार विदिशा वन मंडल के कई परिक्षेत्रों में वनरक्षक, वनपाल स्तर के कर्मचारी 5 से 10 साल से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। नियमानुसार वन विभाग जैसे संवेदनशील महकमे में हर तीन साल में स्थानांतरण का प्रावधान है, ताकि कर्मचारी और तस्करों के बीच सांठगांठ न पनप सके। लेकिन विदिशा में यह नियम फाइलों तक ही सीमित है।
मिलीभगत का आरोप, खानापूर्ति की कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से एक ही बीट में रहने के कारण कुछ कर्मचारियों के लकड़ी माफिया से संबंध बन गए हैं। कटाई की सूचना पहले ही लीक हो जाती है, और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ छोटे-मोटे मामले दर्ज कर खानापूर्ति कर दी जाती है। हाल ही में लटेरी और शमशाबाद रेंज में अवैध कटाई पर दो से चार वनरक्षकों के निलंबन की कार्रवाई हुई, उदयपुर में वन भूमि पर अवैध खदानों पर छापा पड़ा, लेकिन बड़े तस्करों तक आंच नहीं पहुंची।
जिले में घूमते रहते कर्मचारी विदिशा जिले की बात करे तो ज्यादातर स्थानांतरण जिले में ही होते रहते है जिसको कर्मचारी अपने राजनैतिक आकाओं ओर ऊंची पहुंच ओर पैसे के दम पर मनचाही जगह पर करा लेते है और वापस अपने घर पहुंच जाते है
अफसरों की चुप्पी पर सवाल
वन अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के लिए 255 हेक्टेयर तक भूमि मुक्त कराई गई है। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि जब तक जड़ पर प्रहार नहीं होगा, तब तक जंगल नहीं बचेंगे। मांग उठ रही है कि 3 साल से अधिक समय से एक ही जगह जमे समस्त फील्ड अमले की सूची बनाकर तत्काल जिले से बाहर स्थानांतरण किया जाए और उनकी संपत्ति की जांच कराई जाए।
सवाल? क्या कहते है अधिकारी विषय गंभीर है परंतु साल में 20 प्रतिशत स्थानांतरण जिले के जिले में होते है जिसमें कमेटी होती है माननीय प्रभारी मंत्री ओर जिलाधीश महोदय भी उसमें शामिल होते है उनके मार्गदर्शन में सब होता है जिले से बाहर स्थानांतरण शासन के ऊपरी स्तर का है परंतु इस बार अधिक समय से जो लोग एक स्थान पर जमे है उनको हटाया जाएगा हेमंत यादव जिला वनमंडल अधिकारी विदिशा तृतीय श्रेणी के स्थानांतरण जिले से बाहर नहीं किए जाते है जिले में ही होते रहते है आपने अवगत कराया है में अब इस प्रकरण को दिखवाता हु हमारे प्रधानमंत्री जी मुख्यमंत्री जी भी वनों की रक्षा के लिए संकल्पित है लखन पटेल प्रभारी मंत्री विदिशा
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस “जमे हुए तंत्र” पर कुल्हाड़ी चलाता है या फिर विदिशा के जंगल यूं ही कटते रहेंगे।









