महिला इंजीनियरिंग कॉलेज शिक्षा का मंदिर है, भाजपा का कार्यालय नहीं—इसे राजनीति का अखाड़ा न बनाया जाए : हेमराज रावत

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रक्तदान शिविर में राजनीतिक चेहरे को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर उठाए सवाल, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को प्राथमिकता देने की मांग

अजमेर। राजकीय महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, माखूपुरा को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हेमराज रावत ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। रावत ने कहा कि यह संस्थान छात्राओं के भविष्य निर्माण से जुड़ा शिक्षा का केंद्र है और इसे राजनीतिक गतिविधियों या राजनीतिक प्रभाव का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

रावत ने कहा कि उनके अनुसार प्राचार्य प्रो. प्रकृति त्रिवेदी के कार्यकाल में कॉलेज के विभिन्न कार्यक्रमों में भाजपा से जुड़े नेताओं एवं राजनीतिक चेहरों को प्रमुखता दिए जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने शनिवार को आयोजित रक्तदान शिविर में नगर निगम उप महापौर हेमंत सांखला को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि रक्तदान जैसे सामाजिक एवं जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम में किसी चिकित्सक, शिक्षाविद्, रक्तदान विशेषज्ञ अथवा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ को मुख्य अतिथि बनाया जाता तो छात्राओं के लिए इसका शैक्षणिक एवं सामाजिक संदेश अधिक प्रभावी हो सकता था।

रावत ने कहा कि यदि कॉलेज के कार्यक्रमों में राजनीतिक पदाधिकारियों को प्रमुखता दी जा रही है तो कॉलेज प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि अतिथियों के चयन के लिए क्या मापदंड निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पक्षधरता के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं होने का दावा करते हुए राज्य सरकार एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से पूरे मामले की तथ्यात्मक समीक्षा कराने की मांग की। रावत ने कहा कि कॉलेज में आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों, आमंत्रित अतिथियों, कार्यक्रमों की अनुमति तथा आयोजन प्रक्रिया की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

रावत ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से छात्राएं बेहतर शिक्षा और भविष्य निर्माण के लिए इस संस्थान में आती हैं। ऐसे में कॉलेज की प्राथमिकता शिक्षा, शोध, तकनीकी प्रशिक्षण, रोजगार, प्लेसमेंट और छात्राओं के व्यक्तित्व विकास पर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “राजनीतिक गतिविधियां कॉलेज परिसर से बाहर होनी चाहिए। बेटियों के शिक्षा के मंदिर की पहचान राजनीति से नहीं, बल्कि छात्राओं की उपलब्धियों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से होनी चाहिए।”

रावत ने राज्य सरकार एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से मांग की कि यदि जांच में किसी प्रकार की नियम-विरुद्ध गतिविधि सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि महिला इंजीनियरिंग कॉलेज की शैक्षणिक गरिमा और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना सरकार एवं कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है।

 

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