नई हलचल – स्वास्थ्य जागरूकता श्रृंखला
भोपाल डॉ सोहन भार्गव नई हलचल । जब किसी दंपति को संतान नहीं होती तो पहला सवाल आज भी महिला से पूछा जाता है। ताने, टोटके और इलाज सब महिला पर। लेकिन विज्ञान की सच्चाई कुछ और ही है। आंकड़े क्या कहते हैं
CDC और NIH की रिसर्च के अनुसार 40 से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुष से जुड़ा कारण होता है। 20 प्रतिशत में अकेला पुरुष कारण है और 30 से 40 प्रतिशत में पुरुष और महिला दोनों का कारण साथ होता है। यानी हर दूसरे निसंतान दंपति में पुरुष की जांच उतनी ही जरूरी है जितनी महिला की। गांव के युवा क्यों हो रहे हैं शिकार डॉक्टरों का कहना है, हमारे यहां 22 से 35 साल के लड़कों में स्पर्म काउंट तेजी से गिर रहा है।गुटखा, खैनी, तंबाकू: रोज खैनी खाने वाले युवाओं में स्पर्म की गति 50 प्रतिशत तक कम मिल रही है। निकोटिन अंडकोष की नसों को सिकोड़ देता है।
शराब: रोज शराब से टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन घटता है। लिवर खराब होने से हॉर्मोन बैलेंस बिगड़ता है।
गलत आदतें: दिनभर बाइक पर गर्मी में बैठना, टाइट अंडरवियर, गोद में लैपटॉप रखकर घंटों काम, रात में देर तक मोबाइल और नींद कम।
शर्म के कारण जांच नहीं: महिला की सारी जांच हो जाती है, पुरुष वीर्य जांच कराने से कतराता है। इसी शर्म में 2 से 3 साल बर्बाद हो जाते हैं। मिथक बनाम हकीक मिथक: मर्दाना ताकत और पिता बनने की क्षमता एक ही है।
हकीकत: दिखने में हट्टा कट्टा व्यक्ति भी बांझ हो सकता है। ताकत का संबंध मसल्स से है, पिता बनने का संबंध स्पर्म की गुणवत्ता से।
मिथक: एक बच्चा है तो दोबारा कभी दिक्कत नहीं होगी।
हकीकत: दूसरे बच्चे में भी बांझपन हो सकता है, इसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहते हैं।
बचाव और इलाज
नशा आज ही छोड़ें। गुटखा, खैनी, तंबाकू, शराब से 3 महीने में ही स्पर्म में सुधार दिखने लगता है
रोज 30 मिनट टहलना, वजन कंट्रोल, हरी सब्जी, फल, पर्याप्त पानी
ढीले सूती कपड़े पहनें, बहुत गर्म पानी से नहाने से बचें
शादी के 1 साल बाद भी संतान न हो तो पति पत्नी दोनों एक साथ डॉक्टर से मिलें
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में पुरुष बांझपन की जांच निशुल्क होती है। यह कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की बात है।
नई हलचल का संदेश
बच्चा दोनों का है, तो जांच भी दोनों की होनी चाहिए। पुरुष आगे आएंगे तभी हर घर में किलकारी गूंजेगी। आज ही तंबाकू और शराब छोड़ें।









