नई हलचल न्यूज विशेष रिपोर्ट
भोपाल डॉ सोहन भार्गव नई हलचल /रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल अब सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा रिफाइंड और प्रोसेस्ड तेल के इस्तेमाल से लोगों में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ रहा है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा कारण है।
क्यों खतरनाक है रिफाइंड तेल?
ट्रांस फैट का खतरा: रिफाइंडिंग और बार-बार तेल को गर्म करने की प्रक्रिया में इंडस्ट्रियल ट्रांस फैटी एसिड बनते हैं। ये प्राकृतिक नहीं होते और दिल के लिए सबसे हानिकारक माने जाते हैं। FSSAI के अनुसार तेल में ट्रांस फैट 2% से नीचे होना चाहिए।
सैचुरेटेड फैट: कई रिफाइंड तेलों और वनस्पति घी में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। American Heart Association (AHA) की सलाह है कि दिन भर की कुल कैलोरी का केवल 5 से 6% ही सैचुरेटेड फैट से आना चाहिए।
LDL बढ़ना: सैचुरेटेड फैट ज्यादा लेने से खून में LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जैसे हृदय रोग के रिस्क फैक्टर बढ़ सकते हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल 30 से 45 साल की उम्र में ही हाई कोलेस्ट्रॉल के केस तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा संबंध गलत खानपान, रिफाइंड तेल का अधिक उपयोग और तेल को दोबारा गर्म करके इस्तेमाल करने से है।
बचाव के लिए क्या करें?
एक ही तेल को बार-बार गर्म करके न तलें।
रिफाइंड की जगह कोल्ड प्रेस्ड सरसों तेल, मूंगफली तेल या फिजिकली रिफाइंड राइस ब्रान तेल को सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें।
तलने के बजाय भूनना, उबालना और कम तेल में पकाना अपनाएं।
हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट पैदल चलें और साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल जांच कराएं।
यदि आपको पहले से हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई बीपी या दिल की बीमारी है तो तेल बदलने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह जरूर लें।









