एच1 एन 1 (स्वाइन फ्लू): सावधानी, जागरूकता और समय पर उपचार है बचाव की कुंजी

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          नई हलचल का जरूरी स्वास्थ्य संदेश

लेखक: डॉ. इंद्रजीत सिंह रघुवंशी
BMO, लटेरी | शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ                                             (लेखक नई हलचल की स्वास्थ विंग के विशेष आमंत्रित लेखक है)

मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। ऐसे समय में इन्फ्लुएंजा वायरस, विशेषकर एच1 एन 1 को लेकर लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। एच1 एन 1 एक प्रकार का इन्फ्लुएंजा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक और श्वसन बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। अधिकांश मरीजों में बीमारी सामान्य रूप से ठीक हो जाती है, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा कुछ अन्य उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों में गंभीर बीमारी की संभावना अधिक हो सकती है।

एच1 एन 1  के प्रमुख लक्षण

एच1 एन 1   में सामान्यतः—

– तेज या लगातार बुखार
– खांसी एवं गले में खराश
– नाक बहना या बंद होना
– सिर एवं शरीर में दर्द
– कमजोरी और थकान
– बच्चों में कभी-कभी उल्टी या दस्त

जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई, बहुत तेज सांस, छाती में दर्द/धंसना, लगातार उल्टी, अत्यधिक सुस्ती, पानी की कमी, दौरे या ऑक्सीजन की कमी के संकेत दिखाई दें तो घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

बचाव के आसान उपाय

एच1 एन 1 से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बहुत महत्वपूर्ण हैं—

1. हाथों को बार-बार साबुन से धोएं।
2. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
3. बीमार व्यक्ति के बहुत नजदीकी संपर्क से बचें।
4. पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लें।
5. भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यक सावधानी रखें।
6. डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन्फ्लुएंजा वैक्सीन पर विचार करें।

एंटीबायोटिक हर बुखार की दवा नहीं

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि एच1 एन 1 एक वायरस से होने वाला संक्रमण है, इसलिए एंटीबायोटिक हर मरीज में आवश्यक नहीं होती। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक शुरू करना उचित नहीं है। कुछ मरीजों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीवायरल दवा की आवश्यकता हो सकती है।

घबराएं नहीं, जागरूक रहें

एच1 एन 1 का नाम सुनकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकांश मामलों में उचित देखभाल से मरीज ठीक हो जाते हैं। जरूरत है तो केवल लक्षणों की सही पहचान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श और संक्रमण से बचाव की सावधानियों की। विशेषकर बच्चों में बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। माता-पिता को बच्चे की सांस, पानी पीने की क्षमता, पेशाब की मात्रा, सक्रियता और बुखार पर ध्यान देना चाहिए।

जनहित में संदेश

बीमारी छिपाएं नहीं, समय पर बताएं।
बिना सलाह दवा न लें।
सावधानी रखें, जागरूक रहें और स्वस्थ रहें।

 

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