वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर सामूहिक बन्दे मातरम गीत गायन कार्यक्रम आयोजित

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सैण्ट एस.आर.एस. पब्लिक हायर सैकेण्डरी स्कूल में देशभक्ति से ओतप्रोत रहा आयोजन                                                                                   गंजबासौदा  नई हलचल। विद्या भारती संस्थान, नई दिल्ली के आह्वान पर वंदे मातरम् की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में स्थानीय सैण्ट.एस.आर.एस. पब्लिक हायर सेकण्डरी स्कूल, गंजबासौदा में सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजन की जिम्मेदारी विद्या भारती संस्थान, सरस्वती शिशु मंदिर गंजबासौदा से पधारे श्री बृजेंद्र मंडपे ने संभाली और कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि देवेंद्र यादव, मुख्य वक्ता रोहित भावसार , विशेष अतिथि संगीत आचार्य महेंद्र सिंह राजपूत एवं पंकज तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विद्यालय की संगीत टीम ने सरस्वती वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके पश्चात संस्था के डायरेक्टर द्वारा अतिथियों का पुष्पहार, शॉल एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया। संस्था डायरेक्टर स यादव ने वंदे मातरम गीत के महत्व के साथ-साथ बच्चों में संस्कार भावना को जागृत करने की बात कही वही
मुख्य अतिथि देवेंद्र यादव ने अपने संबोधन में वंदे मातरम् की प्रारंभिक रूपरेखा एवं ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
मुख्य वक्ता रोहित भावसार ने अपने ओजस्वी संबोधन में वंदे मातरम् के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् ने देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं मातृभाषा के महत्व पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि देश अंग्रेजों की गुलामी से तो आजाद हो गया, लेकिन अंग्रेजी मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होना अभी भी एक चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के प्रति भी सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शुरू से ही हमें मैकाले शिक्षा पद्धति के माध्यम से पढ़ाया जाता है जिस में क से कबूतर आज बताया जा रहा है ।वहीं हमारे बच्चों को देश के आक्रांताओं के बारे में तो बताया जाता है, किंतु जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व निछावर कर दिया, उनके बारे में बिल्कुल ही नहीं बताया जाता । आज हमें हिंदी वर्णमाला में भ से भगत सिंह पढ़ाना चाहिए न कि भ से भट्टी। हमारा वंदे मातरम गीत हमारे अंदर ओजस्व को प्रवाहित करता है।
विशेष अतिथि संगीत आचार्य महेंद्र सिंह राजपूत ने भारतीय संस्कृति में कर्तव्य एवं ऋण की भावना को समझाते हुए कहा कि जनेऊ के तीन धागे माता-पिता और राष्ट्र के प्रति दायित्वों का स्मरण कराते हैं। उन्होंने भगवान राम, भगवान कृष्ण, महावीर स्वामी, स्वामी विवेकानंद एवं महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के जीवन का उदाहरण देते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र अक्षय रघुवंशी ने अपनी स्वरचित कविता ‘मर्यादा’ का प्रभावशाली पाठ किया। कविता में हाल ही में बिहार में घटित घटना के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य उमेश चंद्र यादव ने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई। पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों में देशभक्ति एवं राष्ट्रप्रेम का उत्साह दिखाई दिया।

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