विदिशा लटेरी नई हलचल,अशोक मीना। भादों मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का पर्व पूरे भारत में डोल ग्यारस के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसी पावन पर्व पर धर्म नगरी लटेरी में आस्था, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। नगर के कोने-कोने में बसे मंदिरों के आराध्य देव अपनी डोल से निकलकर नगर भ्रमण करते हुए जलविहार करेंगे और अपने भक्तों को दर्शन देंगे। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और उमंग का माहौल है।
21 साल की गौरवशाली परंपरा बनी पहचान
लटेरी का डोल ग्यारस मेला महोत्सव आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यह आयोजन पिछले 21 वर्षों से अनवरत रूप से बिना किसी बाधा के श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित होता आ रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि इसकी शुरुआत कुछ मंदिरों के विमानों से हुई थी, लेकिन आज यह नगर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों का एक महासंगम बन चुका है। यह मेला लटेरी की गंगा-जमुनी तहजीब, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हर साल इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 22वें वर्ष में महोत्सव को और भी भव्य और दिव्य रूप दिया जा रहा है।
क्या है डोल ग्यारस और जलविहार का महत्व?
धर्म शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने जलवा पूजन के रूप में जलविहार किया था। इसी मान्यता के अनुसार डोल ग्यारस पर भगवान को डोलों में बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाता है और फिर जलाशय पर ले जाकर उनका जलविहार कराया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान के जलविहार के दर्शन करने से जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यह रहेगा पूरा कार्यक्रम
महोत्सव समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार रहेगी।
दिनांक 22 सितंबर 2026, दिन मंगलवार को दोपहर 1 बजे से नगर के सभी प्रमुख मंदिरों – श्री राधा कृष्ण मंदिर, श्री सीताराम मंदिर, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, श्री हनुमान मंदिर, चित चोर सरकार मंदिर
सहित सभी मंदिरों के विमान आकर्षक फूलों, बिजली की झालरों और नई पोशाकों से सुसज्जित होकर अपने-अपने मंदिरों से रवाना होंगे।
सभी विमान ढोल, नगाड़े, बैंड-बाजे और भजन मंडलियों की मधुर धुनों के साथ नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए तपोवन भूमि स्थित श्री हनुमान मंदिर तालाब आश्रम के पावन तट पर पहुंचेंगे। वहां सभी विमानों का एक ही स्थान पर संगम होगा।
तालाब आश्रम पर संत-महात्माओं के पावन सानिध्य में सभी ठाकुर जी का विधि-विधान से पूजन, दुग्धाभिषेक और महाआरती की जाएगी। इसके पश्चात सभी विमान एक विशाल शोभायात्रा के रूप में जय स्तंभ चौराहा स्थित मुख्य मेला प्रांगण में पहुंचेंगे।
मेला स्थल पर होगी भव्य अगवानी
जय स्तंभ चौराहा पर डोल ग्यारस मेला महोत्सव समिति द्वारा सभी विमानों की भव्य अगवानी की जाएगी। इस दौरान आतिशबाजी का नजारा, पुष्पवर्षा और शंखनाद से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
भजन संध्या और झांकियां होंगी मुख्य आकर्षण
इस वर्ष मेले में कई विशेष आकर्षण रखे गए हैं जो श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहेंगे।
1. सुप्रसिद्ध भजन गायिका का जागरण: रात्रि 8 बजे से मुख्य मंच पर रात्रि जागरण का आयोजन होगा, जिसमें मध्यप्रदेश की सुप्रसिद्ध भजन गायिका श्रीमती संजो बघेल अपनी सुरीली आवाज में राधा-कृष्ण के भजनों की ऐसी अमृत वर्षा करेंगी कि पूरा पंडाल “राधे-राधे” के जयकारों से गूंज उठेगा।
2. सुरक्षा और व्यवस्था: मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। समिति द्वारा पेयजल, प्रकाश और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है।
समिति ने किया आमंत्रण
डोल ग्यारस मेला महोत्सव समिति, लटेरी के समस्त पदाधिकारियों ने समस्त नगरवासियों, व्यापारी बंधुओं, युवा साथियों, मातृशक्ति और आसपास के ग्रामीणजनों से हृदय से अपील की है कि इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में सपरिवार पधारकर भगवान के दिव्य दर्शन करें, भजन संध्या का आनंद लें और इस धर्म आयोजन को सफल बनाकर पुण्य लाभ अर्जित करें









