करैरा: नया अमोला में शराब दुकान के खिलाफ मातृशक्ति का हल्ला-बोल, दुकान से बाहर फेंकी शराब की पेटियां

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महिलाओं ने कहा – गांव का माहौल बिगड़ रहा है, परिवार बर्बाद हो रहे हैं; पुलिस और आबकारी विभाग की टीम मौके पर पहुंची, ग्रामीणों में आक्रोश

करैरा नई हलचल तहसील के ग्राम नया अमोला क्रमांक-2 में मंगलवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने गांव में संचालित देसी-विदेशी शराब दुकान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हाथों में लाठियां लिए सैकड़ों महिलाओं ने शराब दुकान को घेर लिया और दुकान को गांव से हटाने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोश इतना बढ़ गया कि महिलाओं ने दुकान के अंदर रखी शराब की पेटियां और अन्य सामान बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया।

घटना की सूचना मिलते ही अमोला थाना पुलिस और आबकारी विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। करीब दो घंटे तक गांव में तनाव और हंगामे की स्थिति बनी रही।

सुबह से ही एकजुट हुईं महिलाएं

जानकारी के अनुसार ग्राम नया अमोला क्रमांक-2 में पिछले कुछ समय से आबकारी विभाग द्वारा लाइसेंसी शराब दुकान संचालित की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान गांव की आबादी के बीच होने से रोजाना शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा लगने लगता है। गाली-गलौज, मारपीट और घरेलू कलह की घटनाएं बढ़ गई हैं।

इसी से परेशान होकर मंगलवार सुबह करीब 11 बजे गांव की महिलाएं एक-एक कर दुकान के सामने इकट्ठा होने लगीं। देखते ही देखते संख्या 150 से अधिक हो गई। महिलाओं ने “शराब दुकान बंद करो”, “गांव में शराब नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।

महिलाओं का नेतृत्व कर रही ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक-हारकर आज उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

पेटियां बाहर निकालकर फेंकी, मौके पर अफरा-तफरी

प्रदर्शन के दौरान आक्रोश उस समय चरम पर पहुंच गया जब कुछ महिलाओं ने दुकान का शटर खोलकर अंदर रखी शराब की पेटियां बाहर निकालनी शुरू कर दी। देखते ही देखते दुकान के अंदर रखी दर्जनों पेटियां, खाली बोतलें और अन्य सामान बाहर फेंक दिया गया। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दुकान के सेल्समैन ने विरोध करने की कोशिश की तो महिलाओं ने उसे भी खरी-खोटी सुनाई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिलाओं ने दुकान के सामने ही धरना दे दिया और साफ चेतावनी दी कि जब तक दुकान यहां से नहीं हटेगी, वे पीछे नहीं हटेंगी।

एक महिला ने कहा, “हमारे आदमी दिनभर मजदूरी करते हैं और शाम को सारी कमाई इसी दुकान पर उड़ा देते हैं। घर में बच्चों के लिए खाने तक को पैसे नहीं बचते। शराब के कारण घर में रोज झगड़ा होता है। हम अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए दुकान बंद कराना चाहती हैं।”

एक अन्य महिला ने कहा, “गांव की बहू-बेटियों का इस रास्ते से निकलना मुश्किल हो गया है। शराबी नशे में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। गांव का सामाजिक माहौल पूरी तरह खराब हो रहा है। हमारा विरोध किसी व्यक्ति से नहीं है, हमारा विरोध इस दुकान से है।”

पुलिस और आबकारी विभाग ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित महिलाओं को समझाने का प्रयास किया और शांति बनाए रखने की अपील की। इसके कुछ देर बाद आबकारी विभाग के अधिकारी भी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरी स्थिति का जायजा लिया।

पुलिस ने महिलाओं को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की समझाइश के बाद महिलाएं शांत हुईं, लेकिन उन्होंने लिखित में दुकान हटाने की मांग की है।

अमोला थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। महिलाओं द्वारा जो सामान बाहर फेंका गया था, उसे वापस दुकान में रखवाया गया है और दुकान को अस्थायी रूप से बंद कराया गया है।

आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह दुकान शासन द्वारा स्वीकृत लाइसेंस पर संचालित हो रही है और सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। फिर भी महिलाओं की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। मामले की जांच कर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

क्यों बढ़ रहा है महिलाओं में आक्रोश

ग्रामीणों ने बताया कि नया अमोला क्रमांक-2 एक बड़ा गांव है, जहां करीब 2000 की आबादी है। गांव में पहले शराब दुकान मुख्य सड़क पर थी, लेकिन अब इसे गांव के नजदीक शिफ्ट कर दिया गया है। इससे महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि शराब बिक्री के कारण गांव में चोरी, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कई परिवारों में आर्थिक तंगी के कारण भुखमरी जैसे हालात बन गए हैं। युवा पीढ़ी भी नशे की लत की ओर बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए चिंताजनक है।

प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती

इस प्रदर्शन के बाद अब गेंद प्रशासन और आबकारी विभाग के पाले में है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन महिलाओं की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और शराब दुकान को गांव से बाहर शिफ्ट करेगा, या फिर दुकान यथावत संचालित होती रहेगी?

मध्यप्रदेश में कई गांवों में इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं, जहां महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर आंदोलन किया है। कई जगह सरकार ने ग्रामसभा के प्रस्ताव पर दुकानें बंद भी की हैं। ऐसे में नया अमोला की महिलाओं को भी उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी।

फिलहाल ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही दुकान नहीं हटाई गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे और कलेक्टर कार्यालय का घेराव भी करेंगे।

ग्रामीणों की मांग – ग्रामसभा से लिया जाए निर्णय

महिलाओं ने मांग की है कि शराब दुकान के संबंध में ग्रामसभा बुलाई जाए और ग्रामसभा में जो निर्णय होगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई हो। महिलाओं का कहना है कि गांव का शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए शराब दुकान का यहां से हटना बेहद जरूरी है।

समाचार लिखे जाने तक अमोला थाने में इस मामले को लेकर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। पुलिस पूरे मामले को शांतिपूर्ण विरोध के रूप में देख रही है

 

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