सैण्ट एस. आर .एस. पब्लिक हायर सैकण्डरी स्कूल प्रबंधन ने किया शिक्षकों का सम्मान शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव

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गंज बासौदा नई हलचल
भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर नगर के सैण्ट एस.आर.एस.पब्लिक हायर सैकण्डरी स्कूल एवं कौटिल्य गुरुकुलम में शिक्षक दिवस का कार्यक्रम अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय प्रबंधन ने सभी शिक्षकों का श्रीफल, स्मृति-चिन्ह भेंट कर एवं रोली, चंदन लगाकर सम्मान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के डायरेक्टर के.एस. यादव, डायरेक्टर मैम श्रीमती सुधा यादव और विद्यालय के व्याख्याता डॉ. विजय जैन ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण करके किया। इसके पश्चात विद्यालय की संगीत टीम द्वारा सरस्वती वंदना और स्वागत गीत ने सभी का मन मोह लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए संस्था के डायरेक्टर के.एस. यादव ने ‘शिक्षक’ शब्द की सुंदर व्याख्या की। उन्होंने बताया कि ‘शि’ से शिखर तक पहुंचाने वाला, ‘क्ष’ से क्षमा करने वाला तथा ‘क’ से कर्मशील और कमजोरी दूर करने वाला होता है। उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक का स्वभाव नारियल की तरह होता है, जो ऊपर से कठोर किंतु अंदर से सरस और मृदुल होता है।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में हिंदी की शिक्षिका श्रीमती रंजू राठौर ने अपनी स्वरचित कविता “जब खुशी ने दस्तक दी” का सस्वर पाठ कर शिक्षकों के प्रति अपने मनोभाव व्यक्त किए। विद्यालय के व्याख्याता डॉ. विजय कुमार जैन ने अपने उद्बोधन में कहा, कि जीवन में क्या करना चाहिए, यह हमें रामायण सिखाती है और क्या नहीं करना चाहिए यह महाभारत से सीखना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र का उल्लेख करते हुए शिक्षकों को कृष्ण की भांति अपना जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा दी।
युवा शिक्षक अजय अद्वैत ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर आधारित स्वरचित मनहरण छंदों और अपनी कविता “सब धोखा है, अब माया है” के माध्यम से शानदार काव्य पाठ किया। वहीं, प्राइमरी विभाग से आंचल मैम ने “हम शिक्षक हैं, शिक्षा की तस्वीर बदल देंगे” गीत की खूबसूरत प्रस्तुति दी।
डाइरेक्टर मैम श्रीमती सुधा यादव ने सभी शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने कार्य को पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा से करने का संदेश दिया। उन्होंने भावुक होते हुए साझा किया कि बच्चों की प्रथम गुरु माता होती हैं, लेकिन उनके अपने प्रथम गुरु उनके पिता जी बाबूजी रहे हैं, जिनकी सीख आज उनकी सबसे बड़ी धरोहर है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक प्रतिदिन सौ बच्चों से मिलता है, यदि वह उनमें से दस-बीस बच्चों में भी अच्छे संस्कार डाल पाया, तो उसका पुण्य फल समाज और राष्ट्र को समृद्ध करता है।
विद्यालय की पूर्व शिक्षिका श्रीमती रत्ना देशपांडे ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि जीवन में मिलने वाले विभिन्न साथी हमें कुछ न कुछ सिखाकर जाते हैं, इसलिए हमें जीवनभर सीखने की जिज्ञासा बनाए रखनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य उमेश चंद्र यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपनी गरिमा और नैतिक कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक श्री के.पी सिंह चौहान ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

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