देवास नई हलचल/ मध्य प्रदेश में जहरीली और मिलावटी शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले तीन महीने में तीसरा बड़ा शराब कांड देवास जिले में सामने आया है, जहां दो गांवों में महज 20 दिन के भीतर 13 लोगों की मौत हो गई है।
ये मौतें चंदाना और बिंजाना गांव में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच हुईं। जिला मुख्यालय से मात्र पांच किमी दूर चंदाना में 9 लोगों ने दम तोड़ा, जबकि पड़ोसी गांव बिंजाना में 4 लोगों की मौत हुई। मृतकों में ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग हैं। 10 मृतकों के परिजनों का साफ आरोप है कि उनके अपनों की जान जहरीली शराब पीने से गई है।
पहले आंख गई, फिर जान
परिजनों के मुताबिक शराब पीने के बाद लोगों को उल्टियां हुईं, आंखों से दिखना बंद हो गया और फिर मौत हो गई। गांव के फूल सिंह (60 वर्ष) ने बताया कि शराब पीने के बाद उन्हें दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया। वक्त पर अस्पताल पहुंचने से जान बच गई, लेकिन रोशनी नहीं लौटी। उन्हीं के बेटे किशोर (32 वर्ष) ने 27 सितंबर को शराब पी थी, उसे भी यही लक्षण हुए और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। उनके बड़े भाई बल्लू सिंह (65 वर्ष) की भी लगभग उसी समय शराब पीने के बाद मौत हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक चंदाना के दीपक रावत (28), जितेंद्र (35), ओमप्रकाश (35) और भीमा (55) ने 15 अक्टूबर को साथ बैठकर शराब पी थी। अगले दिन चारों की मौत हो गई। चंदाना में ही मोहन (50), सुनील (30) और दरबार सिंह (60) की भी मौत हुई है।
बिंजाना में ओमप्रकाश (45) की 15 अक्टूबर को, रमेश परमार (50) की 29 सितंबर को, निर्भय (60) की 15 अक्टूबर को और महेश प्रजापति (40) की मौत हुई। परिजनों में मौत के कारण को लेकर अलग-अलग दावे हैं, लेकिन ज्यादातर का कहना है कि मौत से पहले शराब पी गई थी।
अभी दो बीमारों का इलाज चल रहा है। कैलाश प्रजापत (28) और संजय (25) इंदौर के अरविंदो और अमलतास अस्पताल में भर्ती हैं। संजय के भाई महेश का कहना है कि शराब पीने के बाद संजय की आंखों की रोशनी चली गई और वह आईसीयू में है।
डायरी सिस्टम से बिक रही थी शराब, बेचने वाले फरार
परिजन व ग्रामीणों के मुताबिक मृतक चंदाना के विंदू जायसवाल और विष्णु जायसवाल से शराब खरीदते थे। दोनों फिलहाल फरार हैं। दोनों शराब बेचने के लिए ठेकेदार की अनुमति होने की बात कहते थे। इस व्यवस्था को ‘डायरी सिस्टम’ बताया जा रहा है, जिसमें शराब बिक्री का हिसाब डायरी में रखा जाता है।
प्रशासन बोला – पानी से मौत, ग्रामीणों का सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन ने उनसे कहा कि इनकी मौत पानी की वजह से हुई है। इस पर ग्रामीणों का सवाल है कि सिर्फ शराब पीने वालों की ही मौत क्यों हुई? पानी तो महिलाएं और बच्चों ने भी पिया, उन्हें कुछ क्यों नहीं हुआ?
वहीं देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह और एसडीएम अभिषेक शर्मा का कहना है कि जहरीली शराब से मौतों की बात भ्रामक है। उन्होंने दावा किया कि चंदाना में हुई मौतें अन्य कारणों से हुईं। जब्त शराब लाइसेंसी थी, उसमें जहर की पुष्टि नहीं हुई।
कमिश्नर एक्साइज दीपक सक्सेना का कहना है कि मामला 15-20 दिन पुराना है, जिसकी जांच कराई थी। शराब की जांच में कोई जहरीला तत्व नहीं मिला। पोस्टमार्टम में मौत का कारण जहरीली शराब नहीं, बल्कि अत्यधिक शराब सेवन से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर सामने आया है। नए तथ्य सामने आते हैं तो और जांच कराई जाएगी।
तीन महीने में तीसरा कांड, अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय
यह घटना अकेली नहीं है। अगस्त में गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हुई थी, जिसके तार मध्य प्रदेश से जुड़े थे। मुख्य आरोपी उज्जैन से गिरफ्तार हुआ था और जब्त शराब पर उज्जैन आबकारी की सील लगी थी।
सितंबर में सागर के बंडा और शाहगढ़ में मिलावटी शराब पीने से 20 से ज्यादा मौतें हुईं। गुजरात से जहरीला स्प्रिट लाया गया था और यूपी से फर्जी रैपर-बोतलें आईं। इनसे नकली ‘सागर गोल्ड’ बनाकर बेचा गया था। अब अक्टूबर में देवास में 13 जान गईं।
ग्रामीणों में दहशत है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। सवाल यही है कि जब हर महीने शराब कांड हो रहा है, तो आबकारी विभाग और पुलिस की निगरानी कहां है









