भोपाल/उज्जैन/गुना नई हलचल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अब सनातन के मुद्दे पर बड़ी पदयात्रा पर निकलने जा रहे हैं। उनकी बहुचर्चित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ का रोड मैप जारी कर दिया गया है।
यात्रा प्रभारी सचिन वत्स के अनुसार यात्रा का आगाज 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के पावन दिन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से होगा। बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेकर यह कारवां करीब 930 से 1000 किलोमीटर का सफर तय कर अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ सम्पन्न होगा।
क्या है पूरा रूट प्लान?
उज्जैन से शुरू होने वाली यह यात्रा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों, कस्बों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी।
यात्रा का विस्तृत रूट इस प्रकार है – उज्जैन से चलकर तराना और शाजापुर, इसके बाद सारंगपुर, खुजनेर और राजगढ़, आगे बढ़ते हुए चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी**। मध्यप्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश सीमा में प्रवेश कर **तालबेहट, जेरोन, फिर रामराजा की नगरी ओरछा (जिला निवाड़ी), इसके बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अंत में अयोध्या पहुंचेगी। नई हलचल की रिपोर्ट के अनुसार यह यात्रा महाकाल मंदिर से शुरू होकर ओरछा में राम राजा के दर्शन के बाद अयोध्या में रामलला मंदिर में समाप्त होगी।
80 साल की उम्र में 1000 किमी चलने का संकल्प
लगभग 80 वर्ष की उम्र में 1000 किमी पैदल चलने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उम्र उनके लिए बाधा नहीं है। रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों पर आम लोगों से संवाद, जनसरोकारों के मुद्दों पर चर्चा और सनातन के मूल्यों पर वैचारिक आदान-प्रदान भी किया जाएगा।
राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा के बहाने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और चढ़ावे में गड़बड़ी का बड़ा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मंदिर के चंदे और चढ़ावे में 200 से 300 करोड़ रुपये तक की कथित हेराफेरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदे का पैसा भाजपा और आरएसएस के कार्यालय बनाने में लगाया गया।
उन्होंने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रहे कथित अधर्म, भ्रष्टाचार और आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ जनजागरण करना है।
गौरतलब है कि पहले 2 अक्टूबर से यात्रा शुरू करने का ऐलान किया गया था, जिसे बाद में बदलकर विजयादशमी 20 अक्टूबर किया गया है। यात्रा को लेकर उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और विश्व हिंदू परिषद से भी साथ आने की अपील की है।









