युवक ने पुलिस में शिकायत दी, मंत्री ने कहा—अपशब्द कहे जाने पर गुस्से में प्रतिक्रिया हुई; सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी आमने-सामने हुए पक्ष
नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के विकासपुरी क्षेत्र में सड़क निर्माण के निरीक्षण के दौरान दिल्ली सरकार के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा एक युवक को कथित तौर पर थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री प्रवेश वर्मा सड़क के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान स्थानीय AAP विधायक जरनैल सिंह और उनके साथ मौजूद लोगों ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। मौके पर सड़क की ऊपरी परत के उखड़ने को लेकर भी चर्चा हुई। इसी दौरान साहिब सिंह नाम का युवक मोबाइल फोन से घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग कर रहा था। वीडियो में मंत्री युवक का मोबाइल नीचे करते और उसके बाद उसे थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं।
घटना के बाद युवक ने पुलिस में शिकायत देने की बात कही है। उसका कहना है कि वह बातचीत की लाइव रिकॉर्डिंग कर रहा था और उसने मंत्री या किसी अन्य व्यक्ति को गाली नहीं दी। दूसरी ओर मंत्री प्रवेश वर्मा ने अपने पक्ष में कहा है कि मौके पर मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति ने उनके परिवार के बारे में अपशब्द कहे, जिसके बाद उन्होंने गुस्से में प्रतिक्रिया दी। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय विधायक की ओर से PWD अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा था। इन आरोपों को लेकर भी दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जनप्रतिनिधि और आम नागरिक के बीच व्यवहार तथा कानून की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। सड़क की गुणवत्ता खराब है या अच्छी, इस पर जांच, तकनीकी परीक्षण और संबंधित विभागीय कार्रवाई की व्यवस्था मौजूद है। यदि किसी नागरिक या जनप्रतिनिधि की ओर से अभद्र भाषा या अन्य कोई कानून-विरुद्ध कृत्य किया गया हो, तो उसके खिलाफ भी शिकायत और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या किसी विवाद की स्थिति में जनप्रतिनिधि द्वारा स्वयं हाथ उठाना उचित प्रक्रिया माना जा सकता है? जनता सड़क, बिजली, पानी और सरकारी निर्माण कार्यों पर सवाल पूछती है और उनकी तस्वीर या वीडियो बनाकर अपनी बात सामने रखती है। दूसरी ओर, यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया हो, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता उपलब्ध है।
इस मामले में पुलिस को शिकायतें मिलने की बात सामने आई है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सवाल सिर्फ एक थप्पड़ का नहीं, बल्कि यह भी है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति और आम नागरिक के बीच विवाद होने पर कानून और संस्थागत प्रक्रिया का पालन किस तरह किया जाता है









