बढ़ते हाईवे, घटते जंगल: विकास की रफ्तार में सांस लेती धरती की पुकार

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                        तेजी से घट रहे जंगल पर नई हलचल की सच्चाई

भोपाल डॉ सोहन भार्गव देश में हाईवे का जाल तेजी से बिछ रहा है। कहीं फोरलेन बन रहा है, कहीं एक्सप्रेसवे के लिए हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। सरकार का तर्क है कि हाईवे से विकास होगा, समय बचेगा, व्यापार बढ़ेगा। लेकिन सवाल यह है कि इस विकास की कीमत कौन चुका रहा है? जवाब है – हमारे जंगल, हमारी जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य। पिछले एक दशक में सड़क परियोजनाओं के लिए लाखों हेक्टेयर वनभूमि का डायवर्जन हुआ है। कई जगह तो पुराने बरगद, पीपल और सागौन के जंगल पूरी तरह साफ हो गए, जो सैकड़ों साल में तैयार हुए थे।

जंगल क्यों जरूरी हैं? जानिए 5 बड़े तर्क

1. जंगल हैं धरती के फेफड़े: एक बड़ा पेड़ साल में करीब 20 किलो कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है और ऑक्सीजन देता है। जंगल कटने से प्रदूषण बढ़ता है, तापमान बढ़ता है और शहरों में हीट वेव का खतरा बढ़ता है।        2. पानी का प्राकृतिक बैंक: जंगल बारिश के पानी को रोकते हैं, भूजल बढ़ाते हैं। जहां जंगल कटे, वहां नदियां सूखीं और कुएं-हैंडपंप जवाब दे गए। हाईवे के किनारे बसे गांवों में पानी संकट इसका जीता-जागता सबूत है।       3. जैव विविधता का घर: एक जंगल में सैकड़ों प्रजातियों के पेड़-पौधे, पक्षी और जानवर रहते हैं। सड़क बनने से उनका गलियारा (कॉरिडोर) टूटता है। नतीजा – सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत और मानव-वन्यजीव संघर्ष।

4. आपदा से सुरक्षा कवच: जंगलों की जड़ें मिट्टी को बांधती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल कटने से भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं।

5. आदिवासी और ग्रामीण जीवन का आधार: लाखों आदिवासी परिवारों की रोजी-रोटी, दवा और संस्कृति जंगल से जुड़ी है। जंगल कटा तो उनकी पहचान भी मिटी।

सवाल: क्या हाईवे जरूरी नहीं? कमी कैसे पूरी हो?

विशेषज्ञ कहते हैं, हाईवे का विरोध विकास का विरोध नहीं है। जरूरत संतुलित रास्ते की है। इसकी कमी ऐसे पूरी हो सकती है:

1. ग्रीन हाईवे नीति का सख्त पालन: एक पेड़ कटे तो 10 पेड़ लगाना और 5 साल तक उनकी देखभाल अनिवार्य हो। सिर्फ गिनती नहीं, सर्वाइवल रेट पर ऑडिट हो।

2. एलाइन्मेंट में बदलाव: जहां घना जंगल हो, वहां सड़क को थोड़ा घुमाकर, एलिवेटेड रोड या टनल बनाकर पेड़ बचाए जा सकते हैं। लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन पर्यावरण बचेगा।

3. मियावाकी (एक विशेष जापानी तकनीक है) और सघन पौधारोपण: हाईवे के दोनों ओर देशी प्रजातियों के सघन जंगल विकसित किए जाएं, न कि सिर्फ शो के लिए विदेशी पौधे।

4. वन्यजीव कॉरिडोर और अंडरपास: जंगली क्षेत्रों में जानवरों के लिए ओवरपास-अंडरपास अनिवार्य हों, ताकि उनकी आवाजाही न रुके।

5. पुराने पेड़ों का ट्रांसलोकेशन: संभव हो तो सैकड़ों साल पुराने पेड़ों को काटने के बजाय मशीनों से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।

विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास किस काम का जो हमारी सांसें ही छीन ले। हाईवे हमें मंजिल तक पहुंचाएंगे, लेकिन जंगल ही तय करेंगे कि हम सांस लेते हुएअपने घर पहुंचेंगे या नहीं

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