पितृ स्मरण में निकली भव्य मंगल कलश यात्रा. भागवत पोथी के साथ चले मुख्य यजमान गंजबासौदा नई हलचल
पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सनातन संस्कारों को समर्पित श्रीमद्भागवत कथा एवं पितृ व्याख्यान का शुभारंभ रविवार को भव्य मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ। श्री शीतला माता मंदिर से शाम 4 बजे गाजे-बाजे के साथ मंगल कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण किए और भक्ति भाव के साथ यात्रा में सहभागिता की। वहीं कथा के मुख्य यजमान मयंक तेनुगुरिया सपत्नीक सिर पर श्रीमद्भागवत जी की पोथी धारण पैदल यात्रा में शामिल हुए। कलश यात्रा का जहाँ जगह-जगह पुष्पों से स्वागत हुआ। वहीं संदीप तिवारी भजन मंडली में एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति पूरी कलश यात्रा मार्ग में दी। गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के बीच निकली यात्रा में श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। महिलाओं की कतार में सिर पर सजे मंगल कलश श्रद्धा और आस्था का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे। यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर विधि-विधान से श्रीमद्भागवत पोथी की स्थापना एवं पूजन किया गया।
भागवत कथा जीवन को संस्कार और भक्ति से जोड़ती है
शास्त्री
कथा के प्रथम दिन कथावाचक आचार्य पंडित केशव शास्त्री ने भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ग्रंथ है। भागवत का श्रवण मनुष्य के भीतर भक्ति, संस्कार और सद्भाव की भावना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि पितरों का स्मरण हमारी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस परिवार में अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा का भाव बना रहता है, वहां संस्कारों की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए भागवत के संदेश को अपने आचरण और परिवार के संस्कारों में उतारने का आह्वान किया। शास्त्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी जड़ों और सनातन परंपराओं से जोड़ना आवश्यक है। श्रीमद्भागवत कथा इसी दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि पितृ स्मरण का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके दिए संस्कारों को जीवन में आगे बढ़ाना भी है। भागवत श्रवण के माध्यम से मनुष्य को भक्ति के साथ अपने कर्तव्यों और पारिवारिक मूल्यों का भी बोध होता है।
10 अक्टूबर तक प्रतिदिन होगा कथा का वाचन
पूर्व विधायक स्व. रामनारायण तेनुगुरिया की स्मृति में आयोजित कथा 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक गणेशपुरा में प्रतिदिन शाम 4 बजे से कथा एवं पितृ व्याख्यान होगा। कथा में 29 सितंबर को परीक्षित कथा एवं शुकदेव जन्म, 1 अक्टूबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 3 अक्टूबर को गिरिराज पूजन, 5 अक्टूबर को रुक्मणी विवाह, 7 अक्टूबर को सुदामा चरित्र, 8 अक्टूबर को नवयोगी संवाद और 9 अक्टूबर को परीक्षित मोक्ष कथा सार का प्रसंग होगा। 10 अक्टूबर को कथा समापन एवं भंडारा प्रसादी का आयोजन किया जाएगा









