गली गली घूम कर फेरी वाले बर्तनों के बदले खरीद रहे पुराने मोबाइल। पुलिस जानकर भी अनजान, आखिर क्यों नई हलचल विदिशा/गंजबासौदा/लटेरी/ आजकल नगर सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों में फेरी लगाने वाले युवक मोटरसाइकिलों पर बर्तन लादकर घूम रहे हैं । वह आवाज लगाकर पुराने मोबाइलों के बदले बर्तन दे रहे हैं। लोग भी मोबाइल के बदले बर्तन खरीद रहे हैं। उनके द्वारा बेचा गया मोबाइल उनकी जान का कभी भी दुश्मन बन सकता है, क्योंकि मोबाइल में उनके स्वयं के डाटा के साथ-साथ कई देश की सुरक्षा से संबंधित डाटा भी होते हैं, जो साइबर ठगों के हाथ तक आसानी से पहुंच जाते हैं। थोड़े से लालच में वे वह सब कुछ गंवा चुके होते हैं, जिनका कभी भी उन्हें अंदाजा नहीं था। फेरी वाले उन मोबाइलों को एक निश्चित व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, और वह व्यक्ति उन मोबाइलों को इकट्ठा कर ऐसे हाथों में पहुंचा देते हैं, जो ठगी के साथ-साथ अन्य क्राईम तक करने से नहीं चूकते। आपके मोबाइल में सुरक्षित किया गया डाटा आप के बैंक खातों से पैसे भी उड़ा देने के लिए काफी है । आपके द्वारा थोड़ी सी की गई गलती के लिए आपको ब्लैकमेल तक कर सकते हैं। जिससे आपके साथ-साथ आपके परिवार का भी जीना दूभर हो जाता है, खासकर महिलाएँ एवं युवतियां उनके निशाने पर अधिक होती हैं, क्योंकि आपके पुराने या टूटे हुए मोबाइल के मदरबोर्ड में आपका पूरा डाटा सुरक्षित रहता है। हम अन जाने में अपने महत्वपूर्ण डाटा को फेरी या कबाड़ी वालों के हाथों में दे रहे हैं। यह डाटा अंतर्राष्ट्रीय ठगों तक पहुंच जाता है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड या बैंक से चोरी होने की घटना भी बढ़ जाती हैं। कई बार आपके मोबाइल के पार्ट्स निकाल कर नया दिखने वाला मोबाइल बना दिया जाता है और उस मोबाइल के माध्यम से अवैध गतिविधियाँ भी संचालित की जाती हैं। अवैध गतिविधियों की पतारसी करते हुए पुलिस आपके पास तक पहुंच जाती है, और आप पर मुकद्दमा दर्ज कर आप को जेल तक भेज सकती है, अतः आप कभी भी किसी भी लालच में अपने पुराने एवं टूटे हुए मोबाइलों को किसी के हाथों में न दें। उन्हें घर पर ही नष्ट कर गहरे गड्ढे में दवा दें, ताकि आप भविष्य की परेशानियों से बच सकें। मजेदार बात तो यह है, कि फेरी वाले पुराने मोबाइलों को खरीदने के लिए गली गली में घूम रहे हैं ,ऐसा नहीं है कि उनकी आवाज पुलिस वालों तक न पहुंचती हो, आवाज पहुंचने के उपरांत भी उन का अनजान व चुप बने रहना खतरे की घंटी है । यह फेरी वाले भी उन मोबाइलों को अपने एजेंट तक पहुंचाते हैं। एजेंट उन्हें विशेष व्यक्तियों तक पहुंचा देते हैं ।ऐसे व्यक्ति महानगरों में गुप्त तरीके से रह कर सारे अंजाम दे रहे हैं। फेरी वाले द्वारा खरीदा गया मोबाइल कहाँ गया, उसे भी पता नहीं होता। मात्र उनके एजेंटों को उन के नाम एवं पते मालूम होते हैं, ऐसा एक फेरी वाले ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया और वह शीघ्र ही गली से रफू चक्कर हो गया।









