अजमेर नई हलचल अनिल कुमार शहरी नगर निगम चुनाव का घमासान खत्म हो चुका है और 14 सितंबर को चुनाव परिणाम भी सामने आ गए। अब राजनीतिक हलकों में अगली नजर गांवों की ओर है, जहां सरपंच पद के चुनाव को लेकर दावेदारों की तैयारियां तेज होती दिखाई दे सकती हैं।
नगर निगम की चुनावी जंग के बाद अब बारी है गांवों के सरपंची दंगल की। इस दंगल में कौन मैदान मारता है, किसे जीत का लड्डू मिलता है और किस प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ता है—यह आने वाला समय बताएगा।
लेकिन गांव की जनता के सामने असली सवाल सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि गांव के विकास का भी होगा। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से तरह-तरह के वादे और लुभावने आश्वासन सामने आ सकते हैं। कोई साफ-सफाई की बात करेगा, कोई सड़क-पानी-नाली की, तो कोई गांव की मूलभूत सुविधाओं और विकास को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाएगा।
अब देखना यह होगा कि चुनावी मैदान में उतरने वाले सरपंच पद के प्रत्याशी जनता को क्या-क्या वादे और आश्वासन देते हैं और जीत के बाद उन वादों को कितना पूरा करते हैं।
गांव की जनता भी इस बार सिर्फ वादे नहीं, बल्कि काम का हिसाब मांगने के मूड में नजर आएगी। आखिरकार सरपंच का चुनाव केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि गांव के भविष्य और विकास से जुड़ा फैसला है।
अब दंगल गांवों में होगा…
देखते हैं किसके सिर बंधता है जीत का सेहरा और किसके हिस्से आती है हार!









