(गंजबासौदा नई हलचल) नशे के खिलाफ नगर वासियों द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत आज दाद जी प्लाजा में नगर के गणमान्य नागरिकों, व्यापारी बंधुओं, पत्रकार साथियों, एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों आदि की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जन जागरण रैली से पूर्व 30 एवं 31 अगस्त को पूरे नगर में नगर वासियों से घर-घर जाकर संपर्क किया जाए और उन्हें इस जन जागरण अभियान में हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया जाए। जन जागरण अभियान के लिए टोलियों का गठन किया गया। प्रथम टोली रेलवे स्टेशन से जय स्तंभ चौक, दूसरी टोली सिद्धेश्वर महादेव मंदिर बरेठ रोड से जय स्तंभ चौक, तीसरी टोली त्योंदा रोड से जय स्तंभ चौक, चौथी टोली जय स्तंभ चौक से राजेंद्र नगर, वहीं 5 वीं टोली तिरंगा चौक से सिरोंज चौराहा होते हुए जय स्तंभ चौक तक पहुँचेगी। ये सभी टोलियां नगर वासियों से सघन संपर्क करेंगीं ।वहीं वार्डों में भी वार्ड पार्षद लोगों को इस अभियान में शामिल करने के लिए प्रेरित करें ।इस अवसर पर वेदांत आश्रम के महंत स्वामी श्री हरिहर दास जी महाराज ने कहा कि संस्कारवान व्यक्ति ही समाज में व्याप्त कुरीतियों पर विजय प्राप्त कर सकता है। हमें सर्वप्रथम अपने बच्चों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार के भी बीज बोना चाहिए। हम देख रहे हैं, कि आज एक शराबी या नशेड़ी अपने साथ कुछ लोगों को मिल लेता है और पूरे समाज को कलंकित करता है। जिस परिवार में कोई व्यक्ति व्यसन करता है, उस परिवार की स्थिति बहुत ही दयनीय हो जाती है ।घर में प्रतिदिन लड़ाई झगड़े होते रहते हैं। वहीं परिवार टूट जाते हैं ।उनके छोटे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और वह भविष्य में कुमार्गों पर चले जाते हैं ।आज हम जिस शिक्षा को ग्रहण कर रहे हैं वह शिक्षा मात्र पालन पोषण तक ही सीमित रह गई है। हमारी शिक्षा में बदलाव की आवश्यकता है। शिक्षा पालन-पोषण के साथ-साथ संस्कारवान भी बनाए। यदि पशु के स्वाभाविक खाद्य पदार्थ में कोई अखाद्य सामग्री मिला दी जाए, तो वह भी अपने स्वाभाविक खाद्य पदार्थ को छोड़ देता है। मनुष्य के लिए प्रकृति ने अनेक खाद्य पदार्थ दिए हैं, किंतु वह सब कुछ जानते हुए भी अखाद्य पदार्थों की ओर जा रहा है। जो बहुत ही चिंतनीय ही नहीं बल्कि सोचनीय भी है । गंज वाले हनुमान मंदिर के महंत स्वामी श्री त्यागी जी ने कहा कि यदि हमें समाज को बदलना है, तो उसे बदलने के लिए दो ही चीजों की आवश्यकता होती है ,एक तो सज्जनता या दूसरा भय। सज्जन व्यक्ति अपने संस्कार एवं व्यवहार से दूसरे लोगों को प्रभावित कर लेता है। कुमार्गगामी व्यक्ति भी सही रास्ते पर आ जाता है। हम लोग मंदिरों से भी समाज को सद्मार्ग की ओर ले जाने के लिए प्रयत्न कर रहे हैं। कभी-कभी हमारी दया वाली भावना हमें परेशानियों में भी डाल देती है, किंतु हम सभी उन परेशानियों से घबराते नहीं है। हमें समाज में बदलाव के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए। दूसरे भय से भी समाज में बदलाव लाया जा सकता है। कहा भी गया है कि बिना भय के प्रीति नहीं होती। आज कई देशों में देखने को मिल रहा है कि वहाँ पर नशा करने वाले व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाती है ।उन्हें कई कई वर्षों तक जेलों में रहना पड़ता है ।हमारे यहाँ भी कानून व्यवस्था है, किंतु वह इतनी लचीली है, कि अपराधी व्यक्ति उसके जाल से सकुशल निकल जाता है। हमें कड़े कानून बनाना चाहिए, ताकि कोई भी व्यसनी, नशेड़ी व्यवसाय में संलिप्त या अन्य कुमार्ग पर चलने वाला व्यक्ति हमारे कानून से बच न सके। व्यक्ति के मन में कानून का इतना भय हो, कि वह कुमार्ग पर जाने से पहले हजारों बार सोचे। कार्यक्रम का संचालन अखिलेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कई सामाजिक संगठनों एवं व्यापारियों ने जन जागरण अभियान के लिए पंपलेट, स्टीकर, पोस्टर आदि बनवाने के लिए भी घोषणा की