भारत की स्वतंत्रता के अस्सी साल : एक अपराजेय यात्रा का महापर्व

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भारत की स्वतंत्रता के अस्सी साल : एक अपराजेय यात्रा का महापर्व (डॉ सोहन भार्गव)
15 अगस्त 2026को भारत अपनी स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे करने जा रहा है। ये सिर्फ एक तारीख नहीं, एक पूरी सभ्यता के पुनर्जागरण की कहानी है। 1947 में जब लाल किले से तिरंगा पहली बार लहराया था, तब दुनिया ने कहा था – ये देश बिखर जाएगा। 79 साल बाद वही भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा है।
(1) 1947 – जहाँ से शुरू हुआ था सब
15 अगस्त 1947 को हमें एक घायल भारत मिला था। बंटवारे का दर्द, खाली खजाना, 33 करोड़ भूखी आँखें, 12% साक्षरता और सुई तक बनाने के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता। अंग्रेज जाते-जाते कह गए थे कि भारत एक साल भी लोकतंत्र नहीं चला पाएगा।
लेकिन हमारे पास था – नेहरू का विजन, पटेल का लौह-संकल्प, बाबा साहेब का संविधान और गांधी का दिया आत्मबल।
2. अस्सी साल की सात बड़ी छलांगें
अन्न से आत्मनिर्भरता तक: 60 के दशक में जब अमेरिका ने पी एल-480 गेहूँ के लिए शर्तें रखीं, हमने हरित क्रांति की। आज भारत दुनिया का अन्न भंडार है, जो 80 देशों को अनाज भेजता है।
सुई से चंद्रयान तक: 1962 में साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने वाले देश ने 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा गाड़ दिया। चंद्रयान-3, आदित्य एल 1, गगनयान – आज इसरो दुनिया की सबसे किफायती और भरोसेमंद स्पेस एजेंसी है।
लोकतंत्र का मंदिर: 79 साल में 18 लोकसभा चुनाव, 400 से ज्यादा विधानसभा चुनाव और एक बार भी लोकतंत्र का पटरी से न उतरना – ये दुनिया के इतिहास में अकेली मिसाल है।
डिजिटल भारत: 2015 तक जहाँ बैंक खाता खुलवाना सपना था, आज यू पीआई से 1000 करोड़ ट्रांजेक्शन हर महीने हो रहे हैं। आधार, जनधन, और डिजिटल इंडिया ने भारत को दुनिया का डिजिटल गुरु बना दिया।
दुनिया की तीसरी महाशक्ति की ओर: 1947 में भारत की जी डी पी 2.7 लाख करोड़ थी, आज 330 लाख करोड़ से ज्यादा। हम ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं और 2027 तक तीसरी बनने की दहलीज पर हैं।

3. वे जख्म जो अभी भी हरे हैं
80वे साल का जश्न मनाते हुए हमें आईना भी देखना होगा।
आज भी असमानता बड़ी चुनौती है। एक तरफ अरबपति हैं तो दूसरी तरफ किसान आज भी कर्ज से जूझ रहा है।
बेरोजगारी, खासकर युवाओं में, हमारे सबसे बड़े संसाधन को चुनौती बना रही है।
पर्यावरण का संकट, नदियों का प्रदूषण और शहरों की हवा – ये विकास की कीमत बन गए हैं।
और सबसे बड़ी चुनौती – हम तकनीक में तो आगे बढ़े, पर क्या हम एक-दूसरे को सुनना-समझना भी उतना ही सीख पाए?
4. अगले 20 साल – अमृत काल से शताब्दी काल तक
प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। अस्सी से सौ साल तक का सफर ही तय करेगा कि भारत सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था बनता है या महान राष्ट्र।
इसके लिए तीन मंत्र जरूरी होंगे:
आत्मनिर्भरता नहीं, आत्म-श्रेष्ठता: सिर्फ अपना बनाना नहीं, दुनिया से बेहतर बनाना।
संस्कार के साथ टेक्नोलॉजी: ए आई और सेमीकंडक्टर के साथ योग और आयुर्वेद का संतुलन।
गाँव से ग्लोबल तक: लटेरी जैसे छोटे कस्बों के युवाओं को भी बेंगलुरु जितना अवसर मिले, तब जाकर स्वतंत्रता पूरी होगी।
निष्कर्ष
79 साल की स्वतंत्रता हमें बताती है कि भारत कोई सरकारों की बनाई चीज नहीं है, ये लोगों का बनाया देश है। ये किसान की फसल में है, जवान की वर्दी में है, वैज्ञानिक की प्रयोगशाला में है और आपके-हमारे जैसे हर आम आदमी की जिद में है।
1947 में हमने अंग्रेजों से आजादी पाई थी, 2026 में हमें गरीबी, नफरत और हीन भावना से आजादी पानी है।
तभी 79 साल का ये महापर्व सार्थक होगा।

जय हिंद!

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